World Suicide Prevention Day
मौत तू बस एक हसीं ख्वाब है
उस महबूब की तरह, जिसे मिलने को रोज़ दुआ करते है
उस मंज़िल की तरह जिसके रास्ते बहुत कठोर है
उस दुकान पर लगे उन खिलोंनो की तरह जिसकी बहुत ज़िद करने पर भी पापा ने दिलाए कहाँ।
तू बस एक आस है
जिसे में पा लूँ, और खो जाऊँ बस तेरे आगोश में
की जैसे इस ज़िन्दगी के सफर का आखिरी पड़ाव है तू।
या यूँ मान लूँ मैं,
की इस संघर्ष पूर्ण जीवन से हार मान के बैठ जाऊँ मैं
चुप हो जाऊँ, कोई जवाब न दूँ, बस शांत हो जाऊँ मैं।
तू जो भी हो
तेरी जुस्तजू बहुत है, पर क्या मालूम
तुझसे मिलके भी उस सुकूँ को खोज न पाऊँ मैं,
उस सुकूँ की मुझे भी तलाश है, जिसे पाने के लिए लोग तुझे गले लगाते है,
पर क्या सच में तुझसे गले लग के वो सुकून की नींद सो पाते है।
क्या सचमुच मुक्त हो जाता है मन
इन बन्धनों के भोज से
इन रिश्तो के मोह से,
इन ज़िम्मेदारियों की दरकार से।
क्या तू सचमुच इतनी खूबसूरत है
की भुला देती है,
माँ के उस आँचल को, पिता के उन कंधो को
बहन के स्नेह, और भाई के प्यार को,
क्या भूल जाता है इंसान अपने ही बच्चों को,
उनके लिए देखे उनके सपनो को,
या भूल जाता है वो सात वचन जो दिए थे साथ निभाने को।
ऐ मौत तू ही जवाब दे,
क्या सचमुच तू एक हसीं ख्वाब है,
या सिर्फ हारे हुए इंसान का एक क्षण का तू जवाब है।
।।साक्षी पृथु वशिष्ठ||
Atti sunder shabhkosh!
ReplyDeleteLife is precious and we should live it fully😊😊
Deep ❤️
ReplyDeleteThanks
Deleteबेहतरीन दी
ReplyDeleteBeautiful and bitter truth.
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